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The Story of ‘Jungle Raj’ in Bihar, which was discussed throughout the election | जानें बिहार के ‘जंगलराज’ की कहानी, जिसकी पूरे चुनाव में होती रही चर्चा

नई दिल्ली: अपहरण…फिरौती और अपराध…आज भी जंगलराज शब्द किसी नेता की जुबान से निकलता है, तो लोगों के जेहन में 15 साल पुराने बिहार (Bihar) की दागदार तस्वीर उभरती है. बिहार में जंगलराज के उस दौर ने बिहार की छवि और तरक्की, दोनों को काफी नुकसान पहुंचाया. लेकिन नीतीश कुमार के 15 साल के सुशासन में बिहार उस बुरे दौर से बाहर निकलने में कामयाब रहा है.

कहानी ‘जंगलराज’ की (घोटाला)
लालू और राबड़ी के शासन में अपराध के साथ-साथ घोटाले भी चरम पर थे. लालू यादव का चारा घोटाला भी जंगलराज के आरोपों पर मुहर लगा रहा था. पुशओं के चारे के नाम पर बिहार के कई जिलों में रुपयों की हेरा-फेरी हुई है. लंबी कानूनी लड़ाई चली और अंतत: लालू को चारा घोटाले में सजा मिली. फिलहाल लालू यादव चारा घोटाले में सजा काट रहे हैं.

कहानी ‘जंगलराज’ की (हत्या और लूट)
जब बिहार में चारा घोटाला हो रहा था, उसी वक्त राबड़ी देवी के भाई साधु यादव और सुभाष यादव का नाम भी सुर्खियों में आने लगा था. लालू के दोनों सालों का दबदबा ऐसा था कि लालू की बेटियों की शादी होती थी तो गाड़ियों के शोरूम में खड़ी नई गाड़ियां उठा ली जाती थीं, उद्योगपति-व्यापारी चाहकर भी कुछ नहीं बोल पाते थे. बिहार में साधु यादव और सुभाष यादव के नाम से कॉरपोरेट कंपनियां और उद्योग तक डर जाते थे. साधु यादव का नाम शिल्पी जैन हत्याकांड में भी उछला था. 1999 में विधायक रहते साधु यादव के सरकारी क्वार्टर से शिल्पी जैन और गौतम सिंह का शव मिला था. इस केस में जब CBI ने साधु यादव से डीएनए टेस्ट कराने को कहा था तो उन्होंने इनकार कर दिया था.

बॉलीवुड में बनी फिल्म ‘गंगाजल’ इसी पर आधारित
वर्ष 2003 में फिल्म निर्देशक प्रकाश झा ने बिहार की राजनीति और अपराध को लेकर फिल्म गंगाजल बनाई थी. इस फिल्म में खलनायक किरदार का नाम साधु यादव रखा था. साधु यादव के समर्थकों ने फिल्म में विलेन का नाम साधु यादव रखने को लेकर आपत्ति जताई थी, लेकिन कोर्ट ने उनकी आपत्ति को खारिज कर दिया था. दीदी और जीजा के शासनकाल में साधु यादव का दबदबा था, उनकी पहचान बिहार में बाहुबली के रूप में होने लगी थी. पिछले कई सालों से साधु यादव की लालू परिवार से दूरी है.

पहली बार किसने किया ‘जंगलराज’ शब्द का इस्तेमाल
बिहार में जंगलराज का दौर तो बिहार के लोगों को अच्छे से याद है, लेकिन बिहार के लिए जंगलराज शब्द का पहली बार इस्तेमाल कैसे हुआ ये शायद ही किसी को याद हो. दरअसल, 5 अगस्त 1997 को एक याचिका पर सुनवाई के दौरान पटना हाई कोर्ट ने बिहार को पहली बार जंगलराज कहा. हाई कोर्ट ने कहा, ‘बिहार में सरकार नहीं है । बिहार में जंगलराज कायम हो गया है.

दबंग विधायक अनंत सिंह के जंगलराज की कहानी
अनंत सिंह बिहार के मोकामा से विधायक हैं. मोकामा में लोग उन्हें छोटे सरकार के नाम से भी जानते हैंः अनंत सिंह की दबंग छवि को पूरा बिहार जानता है. 2007 में एक महिला से रेप और हत्या का आरोप अनंत सिंह पर लगा था. इसके अलावा एक पत्रकार की पिटाई करने और बंधक बनाने का आरोप भी अनंत सिंह पर लग चुका है. पिछले वर्ष अनंत सिंह के घर से AK-47 और बम समेत कई हथियार मिले थे. गिरफ्तारी से बचने के लिए अनंत सिंह कई दिनों तक फरार थे, लेकिन बाद में उन्हें आत्मसमर्पण करना पड़ा. इस केस में अनंत सिंह जेल में बंद हैं. इस बार का विधान सभा चुनाव उन्होंने जेल से ही लड़ा और जीत भी गए.

बिहार में जंगलराज के उस दौर ने बिहार की छवि और तरक्की, दोनों को काफी नुकसान पहुंचाया. नीतीश कुमार के 15 साल के सुशासन में बिहार उस बुरे दौर से बाहर निकलने में कामयाब रहा है. आपको बताते हैं कि कैसे लालू परिवार के शासनकाल में कैसे जंगलराज था, जो नीतीश कुमार के सुशासन में कम हो गया.

नक्सली हमलों में आई कमी
लालू राज में कई जिलों में नक्सली हमले होते थे. नीतीश के 15 साल में नक्सली हमलों में कमी आई है. अब बिहार में नक्सली हिंसा बहुत कम हो गई है.

खूनी जातीय संघर्ष की वारदातों में आई गिरावट
बिहार में रणवीर सेना और एमसीसी के बीच खूनी जातीय संघर्ष होते थे, नीतीश कुमार के 15 साल में खूनी जातीय संघर्ष खत्म हो गए.

बूथ कैप्चरिंग की घटनाएं हुईं बंद
चुनाव के दौरान बूथ कैप्चरिंग को लेकर भी बिहार बदनाम था, नीतीश कुमार के शासनकाल में बूथ कैप्चरिंग की घटनाएं बंद हो गईं.

अपहरण-फिरौती की घटनाओं में कमी
लालू परिवार के शासनकाल में अपहरण एक उद्योग बन चुका था, अब बिहार में अपहरण-फिरौती की घटनाओं में कमी आई है.

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