नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) डिजिटल माध्यम से संयुक्त राष्ट्र आर्थिक एवं सामाजिक परिषद के उच्च स्तरीय सत्र को संबोधित कर रहे हैं. इस वर्ष हम संयुक्त राष्ट्र की स्थापना की 75वीं वर्षगांठ मना रहे हैं. यह संयुक्त राष्ट्र की भूमिका और आज की दुनिया में प्रासंगिकता का आकलन करने का एक अवसर है. 

पीएम ने कहा कि भारत द्वितीय विश्व युद्ध के तुरंत बाद संयुक्त राष्ट्र के 50 संस्थापक सदस्यों में से एक था. उसके बाद से आज तक काफी बदलाव आए हैं. आज संयुक्त राष्ट्र 193 सदस्य देशों को साथ लाता है. 

प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में कहा कि शुरुआत से ही भारत ने संयुक्त राष्ट्र के विकास कार्यों और ECOSOC का सक्रिय समर्थन किया है. ECOSOC के पहले अध्यक्ष एक भारतीय ही थे. ECOSOC के एजेंडा को आकार देने में भारत ने भी योगदान दिया.

आज, अपने घरेलू प्रयासों के माध्यम से, हम सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने में एक प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं और एजेंडा 2030 में अपना योगदान दे रहे हैं. हम अन्य विकासशील देशों को भी  उनके सतत विकास लक्ष्यों को पूरा करने में मदद कर रहे हैं. हमारा मकसद है ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’- जिसका अर्थ है, ‘सबके विसाक के लिए, सबके विश्वास के साथ’. 

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संयुक्त राष्ट्र आर्थिक एवं सामाजिक परिषद के उच्च स्तरीय सत्र को संबोधित पीएम ने कहा कि चाहे भूकंप, चक्रवात, इबोला संकट या कोई अन्य प्राकृतिक या मानव निर्मित संकट हो, भारत ने तेजी और एकजुटता के साथ जवाब दिया है. कोरोना के खिलाफ हमारी संयुक्त लड़ाई में हमने 150 से अधिक देशों में चिकित्सा और अन्य सहायता उपलब्ध करवाई है.

प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारे 600,000 गांवों में पूर्ण स्वच्छता प्राप्त करके हमने पिछले साल राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जयंती मनाई. जब भारत एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में अपने 75 साल पूरे करेगा तब हमारा ‘हाउसिंग फॉर ऑल’ कार्यक्रम 2022 तक प्रत्येक भारतीय के सिर पर एक सुरक्षित छत सुनिश्चित करेगा. COVID-19 महामारी ने दुनियाभर के देशों की परीक्षा ली है. भारत में, हमने सरकार और नागरिकों के प्रयासों से महामारी के खिलाफ लड़ाई को एक जन आंदोलन बनाने की कोशिश की है.

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पीएम ने कहा कि विकास के पथ पर आगे बढ़ते हुए, हम अपने प्लानेट के प्रति अपनी जिम्मेदारी को नहीं भूल रहे हैं. पिछले कुछ वर्षों में, हमने सालाना 38 मिलियन टन कार्बन उत्सर्जन कम किया है. हमारे यहां प्रकृति के साथ सद्भाव में रहने की एक पुरानी परंपरा है. हमने स्वच्छता और प्लास्टिक इस्तेमाल को कम करने के लिए बड़े अभियान चलाए. 

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हम 2025 तक टीबी को खत्म करने का लक्ष्य भी हासिल कर लगेंगे. अन्य विकासशील देश भारत के विकास कार्यक्रमों के पैमाने और सफलता से सीख सकते हैं. संयुक्त राष्ट्र मूल रूप से द्वितीय विश्व युद्ध के उपद्रवों से पैदा हुआ था. आज महामारी के प्रकोप ने इसके पुनर्जन्म और सुधार के नए अवसर प्रदान किए हैं. आइए हम यह मौका न गंवाएं. 

गौरतलब है कि भारत के संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अस्थायी सदस्य के चुनाव में जीत के बाद यह पहला मौका है जब प्रधानमंत्री ने संयुक्त राष्ट्र को संबोधित किया. भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के अस्थायी सदस्य के रूप में 2021-22 सत्र के लिए निर्वाचित हुआ है.

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