नई दिल्ली: पर्सनल डाटा प्रोटेक्शन बिल (Personal Data Protection Bill) की समीक्षा कर रही संसदीय समिति (Parliamentary Committee) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की पूछताछ के बाद अब उन संचालकों से सवाल कर रही है, जो देश के नागरिकों का डेटा एकत्र करते हैं. इसी क्रम में समिति ने गुरुवार को ओला और उबर के वरिष्ठ अधिकारियों बातचीत की और सर्ज प्राइसिंग व ट्रांसपोर्ट कंपनी बनने को लेकर कई कड़े सवाल किए.

कैब एग्रीगेटर्स से ट्रांसपोर्ट कंपनी बनने पर सवाल
संसदीय समिति की अध्यक्ष मीनाक्षी लेखी (Meenakshi Lekhi) ने बताया, ‘पैनल ने कैब एग्रीगेटर्स उबर और ओला के अधिकारियों से पूछा कि उन्होंने अपना बिजनेस कैब एग्रीगेटर्स के तौर शुरू किया था, लेकिन क्या अब वे अपनी गाड़ियों के ग्रुप के साथ ट्रांसपोर्ट कंपनी बन गए हैं?’ उन्होंने बताया कि कंपनियों से यह भी पूछा गया कि क्या वे ड्राइवर को निर्धारित वेतन देकर अपनी कारें चलाते हैं. इस पर दोनों कंपनियों ने स्वीकार किया कि कैब एग्रीगेटर्स होने के अलावा, उनकी अपनी कार भी हैं.

सर्ज प्राइसिंग पर पैनल ने किया सवाल
उन्होंने बताया, ‘पैनल ने ओला और उबर के अधिकारियों से सर्ज प्राइसिंग (Surge Pricing) को लेकर भी सवाल किए. उनसे पूछा गया कि किस तरह यात्री के लोकेशन, जेंडर, टाइम और फोन में मौजूद बैटरी के आधार पर मूल्य निर्धारण किया जाता है?’ उन्होंने बताया कि कंपनियों से यह भी पूछा गया कि क्या सर्ज प्राइसिंग की कोई सीमा है? इसके साथ ही उनसे समिति के सवालों का लिखित जवाब मांगा गया है.

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क्या अपनी कारों को दिए जाते हैं ज्यादा राइड
मीनाक्षी लेखी ने यह भी बताया कि पैनल ने दोनों कंपनियों के अधिकारियों से यह भी सवाल किया कि क्या वे अपनी कारों को तरजीह देकर ज्यादा राइड देते हैं और थर्ड पार्टी को कम राइड देते हैं, क्योंकि अपनी कारों को ज्यादा सवारी देकर ज्यादा कमाएंगे? इस पर भी उनसे लिखित जवाब मांगा गया है.

उबर ने बताया उसके पास 4000 कारें हैं
सूत्रों के अनुसार, बैठक में उबर ने बताया कि उनके पास लगभग 4000 कारें हैं. इस साल के अंत तक कारों को ड्राइवरों को सौंप दिया जाएगा और उबर केवल एक कैब एग्रीगेटर कंपनी रहेगी.

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