Breaking News

ICC umpire Anil Chaudhary solvesnetwork problems in his village in UP | इस ICC अंपायर की कोशिश रंग लाई, अब यूपी के गांव में लोग पेड़ पर चढ़कर नहीं करते कॉल

नई दिल्ली: कोरोना वायरस की वजह से क्रिकेट गतिविधियां ठप्प होने से चौके, छक्के, आउट के ‘सिग्नल’ नहीं दे पाने वाले आईसीसी पैनल के अंपायर अनिल चौधरी (Anil Chaudhary) इस दौरान उत्तर प्रदेश के अपने गांव में ‘मोबाइल के सिग्नल’ लाने में जुटे रहे और आखिर में उनकी कोशिश रंग लाई और अब गांववासियों को ‘पेड़ पर चढ़कर बात नहीं करनी पड़ती है.’

यह भी पढ़ें- इन 5 क्रिकेटर्स ने लगातार खेले हैं सबसे ज्यादा टेस्ट मैच

चौधरी लॉकडाउन के दौरान उत्तर प्रदेश के शामली जिला स्थित अपने गांव डांगरोल में फंस गये थे जहां मोबाइल नेटवर्क न होने की वजह से वो किसी से भी संपर्क नहीं कर पा रहे थे. यहां तक कि वह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) की कार्यशालाओं में भी भाग नहीं ले पाये थे. इसके बाद चौधरी ने गांव में नेटवर्क सुधारने का बीड़ा उठाया और अब जाकर उन्हें इसमें कामयाबी मिली है.

चौधरी ने ‘भाषा’ से कहा, ‘मैंने आईसीसी की कुछ कार्यशालाओं में भाग लिया लेकिन जब मैं गांव में था तब ऐसा नहीं कर पाया था. मुझे इसके लिए दिल्ली जाना पड़ता था. ऐसे में मेरा एक पांव दिल्ली में तो दूसरा गांव में होता था.’ अब तक 20 वनडे और 28 टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में अंपायरिंग कर चुके चौधरी की परेशानी पर ‘भाषा’ से रिपोर्ट की थी जिसके बाद एक मोबाइल प्रदाता कंपनी ने उनसे संपर्क किया और पिछले कई सालों से नेटवर्क के लिए सरकारी कार्यालयों की खाक छानने वाले ग्रामीणों ने अब जाकर राहत की सांस ली.

चौधरी ने कहा, ‘मैं अब भी गांव में हूं लेकिन अब मुझे अपने पेशे से जुड़े किसी काम के लिए दिल्ली भागने की जरूरत नहीं है. मैं गांव से ही तमाम कार्यशालाओं में भाग ले सकता हूं.’ उन्होंने ये भी कहा, ‘मौजूदा हालात में यह ग्रामीणों और खासकर स्टूडेंट्स को नेटवर्क की सख्त जरूरत थी और जब कई गांववाले मेरा आभार व्यक्त करने आये तो तब मुझे लगा कि गांववासियों के लिये वास्तव में यह बड़ी उपलब्धि है. अब उन्हें फोन करने के लिए पेड़ नहीं चढ़ना पड़ता है.’

चौधरी को भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच एकदिवसीय मैचों में अंपायरिंग करनी थी लेकिन सीरीज बीच में ही रोक दिए जाने के कारण वह 16 मार्च को अपने गांव डांगरोल आ गए थे. इसके बाद उनकी परेशानियां शुरू हो गई लेकिन उन्होंने यहीं से राष्ट्रीय राजधानी से लगभग 80 किलोमीटर दूर स्थित इस क्षेत्र को इस परेशानी से निजात दिलाने का संकल्प लिया था.

जालंधर में एक निजी विश्वविद्यालय में प्रोफेसर के पद पर कार्यरत डा. सुभाष ने कहा कि अगर चौधरी इसमें दिलचस्पी नहीं दिखाते तो यह समस्या ज्यों की त्यों बनी रहती. उन्होंने कहा, ‘अंपायर साहब की मेहनत रंग लाई. अब मैं गांव से ही ऑनलाइन कक्षाएं ले पा रहा हूं.’
(इनपुट-भाषा)

Check Also

Guinea declares end to deadly Ebola outbreak that killed 12 people, WHO reports

Guinea has declared an end to an Ebola outbreak that emerged in February and killed …

Sara Ali Khan shares adorable childhood pic from school, can you spot her? | People News

New Delhi: On Saturday (June 19), Bollywood actress Sara Ali Khan took to Instagram to …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *