ब्रेस्ट मिल्क को ज्यादा पौष्टिक बनाने के लिए क्या करें? जानें खास उपाय

मां का दूध ही बच्चे के लिए संपूर्ण आहार होता है। मां के दूध से बच्चे को शुरुआती दौर में सभी पोषक तत्व मिलते हैं। इस दूध से प्राप्त होने वाले पोषण से शिशु की इम्युनिटी पावर मजबूत होती है और वह कई रोगों और बीमारियों से सुरक्षित रहता है। इस समय महिला जिस तरह का आहार ग्रहण करती है उसका सीधा असर ब्रेस्ट मिल्क पर भी पड़ता है। आपको बता दें कि मां के दूध में सभी पोषक तत्व होना बेहद आवश्यक है, इससे ही बच्चा आने वाले भविष्य के लिए तैयार होता है। कई बार महिलाओं के ब्रेस्ट मिल्क में वसा (फैट) के तत्व कम होने से शिशु को पर्याप्त वसा नहीं मिल पाती है। जिसकी वजह से उनका वजन तेजी से बढ़ने की अपेक्षा स्थिर हो जाता है। आगे जानते हैं महिलाएं अपने ब्रेस्ट मिल्क में फैट की मात्रा को कैसे ठीक कर सकती हैं।  

मां के दूध में फैट की मात्रा कितनी होनी चाहिए?  

ब्रेस्ट मिल्क में फैट की मात्रा पूरे दिन अलग-अलग रहती है, क्योंकि यह ब्रेस्ट मिल्क के पूरे खाली होने पर निर्भर करती है। मां के दूध की 100 ग्राम मात्रा में करीब 75 kcal ऊर्जा व 4.2  ग्राम फैट होता है। मां के दूध में पॉलिअनसैचुरेटेड फैट, सैचुरेटेड फैट, मॉनोसैचुरेटेड फैट, व ओमेगा 3 फैटी एसिड पाया जाता है।  

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breast milk fat

ब्रेस्ट मिल्क में फैट व न्यूट्रिशियन को कैसे बढ़ाएं 

आगे कुछ घेरलू उपाय बताए गये हैं जिनकी मदद से महिलाएं बच्चों को पिलाने वाले ब्रेस्ट मिल्क के न्यूट्रिशन वैल्यू को बढ़ा सकती है।  

ब्रेस्ट की मसाज करें 

शिशु को स्तनपान कराने से पहले व बाद महिलाओं को स्तनों को हल्की मसाज करनी चाहिए। इससे ब्रेस्ट मिल्क में फैट बढ़ता है और दुग्ध नलिकाएं साफ होती है। इस प्रक्रिया से स्तन पूरी तरह खाली हो जाते हैं। जिससे ब्रेस्ट मिल्क में वसा के स्तर में सुधार होता है।   

दूध पिलाते समय स्तनों को पूरी तरह खाली करें  

शिशु को दूध पिलाते समय महिलाओं को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि वह दोनों ही स्तनों से बच्चे को दूध पिलाएं। लेकिन एक स्तन से दूसरे स्तन की तरफ जाने से पहले ये सुनिश्चित कर लें कि बच्चे ने पहले वाले स्तन का पूरा दूध पी लिया है। यदि स्तन में पहले से ही दूध रह जाता है तो इससे उसमें फैट का स्तर कम होने लगता है। यदि बच्चा पूरा दूध नहीं पी रहा है तो महिला ब्रेस्ट पंप की मदद से दूध को बाहर निकाल सकती हैं।  

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संतुलित आहार का सेवन करें  

मां के खानपान का असर ब्रेस्ट मिल्क पर पड़ता है। ब्रेस्ट मिल्क में पर्याप्त मोनोसैचुरेटेड और पॉलीअनसैचुरेटेड फैटी एसिड की मात्रा शिशु के मस्तिष्क के विकास में मदद करती है। ब्रेस्ट मिल्क में पोषक तत्वों को बढ़ाने के लिए महिलाओं को साबुत अनाज, हरी पत्तेदार सब्जियां, अलसी के बीज, अंडा, सूरजमुखी के बीज, सोयाबीन और अन्य फलों का सेवन करना चाहिए।  

यदि आपके ब्रेस्ट मिल्क में पर्याप्त पोषण तत्व नहीं हैं तो इससे बच्चे के कई तरह की रोग हो सकते हैं। ऐसे में महिलाओं को डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।